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पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो अपनी प्रतिष्ठा के प्रति कभी सचेत नहीं रहा हैं यह केवल राजनेताओं का दोष नहीं है अपितु पाकिस्तान निर्माण की प्रक्रिया ही कुछ ऐसी थी कि उसमें राष्ट्रीयता की भावना का जन्म नहीं हुआ। जिन्नाह ने यह अवश्य कहा था कि पाकिस्तान मुस्जिम राष्ट्र है। असल में जहाँ इस्लाम शब्द का प्रयोग होता हो, वहाँ राष्ट्र की अवधारणा का प्रयोग नहीं हो सकता। इस्लामी विश्वास राजनीतिक भूखण्डों में विश्वास नहीं रखता, वह संसारभर को हरा रंग देने का पक्षधर है। खलीफा व्यवस्था इसी का प्रमाण हैं अमेरिका ने जिस तरह से एबेटाबाद पर आक्रमण किया और लादेन को मार दिया, लेकिन प्रधानमंत्राी गिलानी संसद में जोशीला भाषण देकर अपनी झेंप मिटाने का प्रयास करते है। कोई भी जीवंत देश और समाज अमेरिका जैसे आक्रमण का विरोध नहीं किया। इससे साफ है कि वहाँ सम्मान नामक तत्व निवास नहीं करता। पाक मीडिया अवश्य सील कमांडो की कार्यवाही पर आपत्ति कर रहा है लेकिन अमेरिका से सम्बन्ध तोड़ने की बात कोई नहीं कर रहा हैं इससे साफ है कि पाक की आत्मा मर चुकी है और वह किसी जीवित देश की भांति यवहार नहीं करता है। पाकिस्तान के सामरिक स्थलों पर अमेरिका का अधिकार है। पिछले दिनों अमेरिका के एक जासूस ने दो पाकिस्तानियों की हत्या कर दी थी। लेकिन वहाँ की सरकार आरोपी को कानून के अनुसार सजा नहीं दे सकी। उसे छोड़ दिया गया। लेकिन वही पाकिस्तान अल्पसंख्यकों को उत्पीडि़त करने में शेर बन जाता है। ईश निन्दा कानून के द्वारा अनेक हिन्दुओं और ईसाइयों की हत्या कर दी गई। मन्दिरों को तोड़ा जा रहा है। हिन्दू महिलाओं का अपहरण हो रहा है। उनकी सम्पत्ति पर कब्जा किया जा रहा हैं स्वयं को इस्लाम का खिदमदार कहने वाले अमेरिका के सामने मौन हो जाते है। कश्मीर प्रकरण को लेकर पाक में आये दिन जुलूस निकलते रहते है। मुल्ला मौलवी जेहाद की घोषणा रोज करते हैं लेकिन उस समय साॅस रूक जाती है जब अमेरिका की बात आती हैं गिलामी ने पिछले दिनों कहा कि चीन उनका सबसे खास मित्रा है। साथ ही पाक सरकार उम्मत यानि इस्लामी जगत की रक्षा की बात करती है। चीन में इस्लामी शिक्षा और प्रसार को प्रतिबन्धित कियागया हैं जिन क्षेत्रों में मुस्लिम रहते है, वहाॅ धा£मक प्रयोजन के लिये चीनी भाषा की अनिवार्य रखी गई है। चीन में कोई मदरसा नहीं खोला जा सकता। कुछ चीनी मुसलमान युवक मजहबी तालीम के लिये पाक आये थे और उन्होंने इस्लामाबाद के एक प्रमुख मदरसे में प्रवेश ले लिया था। जब वे युवक चीन वापस गये तो चीनी सरकार ने उन्हें मृत्यु दण्ड ले दिया। यह एक घोर अमानवीय कुकृत्य था लेकिन किसी भी इस्लामी देश ने चीन का विरोध नहीं किया। विशेषकर पाकिस्तान को अवश्य विरोध करना चाहिए था क्योंकि वे युवक उसके मदरसों के छात्रा रह चुके थे। यह कैसा मजहब प्रेम है कि जो देश उनकी मजहबी भावना और हितों को सर्वाधिक हानि पहुंचा रहे है, वे पाकिस्तान के मित्रा है। भारत जैसा देश जहाँ मुस्लिम सर्वाधिक सुरक्षित और विकासमान है उससे शत्राुता? इसका अर्थ साफ है कि पाकिस्तान की कोई विचारधारा नही है। विचारहीन देशजीवित नहीं कहा जा सकता। वह केवल भारत और हिन्दू समाज का विरोधी है। उनकी वीरतर और जेहाद के नारे भारत की सीमा को ही स्पर्श करते है। चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत में सेना ने हजारों का कत्ल कर दिया, मानवाधिकार नाम की कोई चीज वहाँ नहीं है। उनके मजहबी विश्वासों पर प्रतिबन्ध हैं फिर भ्ीा चीन को अपना खास मित्रा घोषित करता है पाक। असल में पाक की जनता और वहाँ की सरकार केवल हिन्दू विरोध को ही अपने मजहब की सेवा मानती हैं उसे न तो चीन के मुसलमान विरोधी व्यवहार पर कोई आपत्ति है और न ही ईसाई देशों के कुचक्रों के प्रति वह सावधानी बरत रहा है। जिस पाकिस्तान में मन्दिर तोड़े जाते है, वहाँ चर्चों का निर्माण तेज गति के साथ हो रहा है। इस्लामाबाद में भव्य चर्च का निर्माण किया गया है। जितने भी राजनेता और सेना के अधिकारी है, उन सबके बच्चें ईसाइयों द्वारा स्थापित स्कूलों में पढ़ते है। स्थानीय भाषायें समाप्त होती जा रही है। अधिकृत कश्मीर के लोग अपनी मात् भाषा को भूल चुके है। यही स्थिति अन्य भाषाओं के साथ भी है। उर्दू और अंग्रेजी पाक के किसी क्षेत्रा की भाषा नहीं रही हैं ये दोनों वहाँ स्थापित हो चुकी है। कुल मिलाकर पाकिस्तान मर गया है, हर दृष्टि से।
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Munna Kumar Sharma