Hindu Mahasabha Published ‘Diary-2011′
गुजरात प्रदेश, अखिल भारत हिन्दू महासभा.
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प्रदेश अध्यक्ष, गुजरात प्रदेश, अखिल भारत हिन्दू महासभा.
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प्रदेश गोरक्षा प्रकोष्ठ अध्यक्ष.
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प्रदेश गोरक्षा संगठन मंत्री
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प्रदेश उप -प्रमुख, गोरक्षा प्रकोष्ठ
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मर गया है पाकिस्तान
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पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो अपनी प्रतिष्ठा के प्रति कभी सचेत नहीं रहा हैं यह केवल राजनेताओं का दोष नहीं है अपितु पाकिस्तान निर्माण की प्रक्रिया ही कुछ ऐसी थी कि उसमें राष्ट्रीयता की भावना का जन्म नहीं हुआ। जिन्नाह ने यह अवश्य कहा था कि पाकिस्तान मुस्जिम राष्ट्र है। असल में जहाँ इस्लाम शब्द का प्रयोग होता हो, वहाँ राष्ट्र की अवधारणा का प्रयोग नहीं हो सकता। इस्लामी विश्वास राजनीतिक भूखण्डों में विश्वास नहीं रखता, वह संसारभर को हरा रंग देने का पक्षधर है। खलीफा व्यवस्था इसी का प्रमाण हैं अमेरिका ने जिस तरह से एबेटाबाद पर आक्रमण किया और लादेन को मार दिया, लेकिन प्रधानमंत्राी गिलानी संसद में जोशीला भाषण देकर अपनी झेंप मिटाने का प्रयास करते है। कोई भी जीवंत देश और समाज अमेरिका जैसे आक्रमण का विरोध नहीं किया। इससे साफ है कि वहाँ सम्मान नामक तत्व निवास नहीं करता। पाक मीडिया अवश्य सील कमांडो की कार्यवाही पर आपत्ति कर रहा है लेकिन अमेरिका से सम्बन्ध तोड़ने की बात कोई नहीं कर रहा हैं इससे साफ है कि पाक की आत्मा मर चुकी है और वह किसी जीवित देश की भांति यवहार नहीं करता है। पाकिस्तान के सामरिक स्थलों पर अमेरिका का अधिकार है। पिछले दिनों अमेरिका के एक जासूस ने दो पाकिस्तानियों की हत्या कर दी थी। लेकिन वहाँ की सरकार आरोपी को कानून के अनुसार सजा नहीं दे सकी। उसे छोड़ दिया गया। लेकिन वही पाकिस्तान अल्पसंख्यकों को उत्पीडि़त करने में शेर बन जाता है। ईश निन्दा कानून के द्वारा अनेक हिन्दुओं और ईसाइयों की हत्या कर दी गई। मन्दिरों को तोड़ा जा रहा है। हिन्दू महिलाओं का अपहरण हो रहा है। उनकी सम्पत्ति पर कब्जा किया जा रहा हैं स्वयं को इस्लाम का खिदमदार कहने वाले अमेरिका के सामने मौन हो जाते है। कश्मीर प्रकरण को लेकर पाक में आये दिन जुलूस निकलते रहते है। मुल्ला मौलवी जेहाद की घोषणा रोज करते हैं लेकिन उस समय साॅस रूक जाती है जब अमेरिका की बात आती हैं गिलामी ने पिछले दिनों कहा कि चीन उनका सबसे खास मित्रा है। साथ ही पाक सरकार उम्मत यानि इस्लामी जगत की रक्षा की बात करती है। चीन में इस्लामी शिक्षा और प्रसार को प्रतिबन्धित कियागया हैं जिन क्षेत्रों में मुस्लिम रहते है, वहाॅ धा£मक प्रयोजन के लिये चीनी भाषा की अनिवार्य रखी गई है। चीन में कोई मदरसा नहीं खोला जा सकता। कुछ चीनी मुसलमान युवक मजहबी तालीम के लिये पाक आये थे और उन्होंने इस्लामाबाद के एक प्रमुख मदरसे में प्रवेश ले लिया था। जब वे युवक चीन वापस गये तो चीनी सरकार ने उन्हें मृत्यु दण्ड ले दिया। यह एक घोर अमानवीय कुकृत्य था लेकिन किसी भी इस्लामी देश ने चीन का विरोध नहीं किया। विशेषकर पाकिस्तान को अवश्य विरोध करना चाहिए था क्योंकि वे युवक उसके मदरसों के छात्रा रह चुके थे। यह कैसा मजहब प्रेम है कि जो देश उनकी मजहबी भावना और हितों को सर्वाधिक हानि पहुंचा रहे है, वे पाकिस्तान के मित्रा है। भारत जैसा देश जहाँ मुस्लिम सर्वाधिक सुरक्षित और विकासमान है उससे शत्राुता? इसका अर्थ साफ है कि पाकिस्तान की कोई विचारधारा नही है। विचारहीन देशजीवित नहीं कहा जा सकता। वह केवल भारत और हिन्दू समाज का विरोधी है। उनकी वीरतर और जेहाद के नारे भारत की सीमा को ही स्पर्श करते है। चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत में सेना ने हजारों का कत्ल कर दिया, मानवाधिकार नाम की कोई चीज वहाँ नहीं है। उनके मजहबी विश्वासों पर प्रतिबन्ध हैं फिर भ्ीा चीन को अपना खास मित्रा घोषित करता है पाक। असल में पाक की जनता और वहाँ की सरकार केवल हिन्दू विरोध को ही अपने मजहब की सेवा मानती हैं उसे न तो चीन के मुसलमान विरोधी व्यवहार पर कोई आपत्ति है और न ही ईसाई देशों के कुचक्रों के प्रति वह सावधानी बरत रहा है। जिस पाकिस्तान में मन्दिर तोड़े जाते है, वहाँ चर्चों का निर्माण तेज गति के साथ हो रहा है। इस्लामाबाद में भव्य चर्च का निर्माण किया गया है। जितने भी राजनेता और सेना के अधिकारी है, उन सबके बच्चें ईसाइयों द्वारा स्थापित स्कूलों में पढ़ते है। स्थानीय भाषायें समाप्त होती जा रही है। अधिकृत कश्मीर के लोग अपनी मात् भाषा को भूल चुके है। यही स्थिति अन्य भाषाओं के साथ भी है। उर्दू और अंग्रेजी पाक के किसी क्षेत्रा की भाषा नहीं रही हैं ये दोनों वहाँ स्थापित हो चुकी है। कुल मिलाकर पाकिस्तान मर गया है, हर दृष्टि से।
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Munna Kumar Sharma
युवा वर्ग हिन्दू महासभा से जुड़े
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देश है युवा शक्ति को राष्ट्र शक्ति कहा जाता है। मानव विकास की यात्रा का पहला पढ़ाव तत्कालीन युवा वर्ग की जिज्ञासापूर्ण साहस भावना ने ही किया था। इतिहासकार कहते है कि पूर्व आदिम युग से लेकर धातु युग तक की यात्रा युवाओं के मस्तिष्कीय क्रियाओं के परिवर्तन के कारण सम्पन्न हुई युवा वर्ग में विवेक ग्रन्थि अधिक सक्रिय और ता£कक होती है। जितनह आयु बढ़ती है उतनी ही ता£कक कम होती जाती है। यहाॅ ये परिवर्तन का दौर समाप्त हो जाता है। साथ ही सामाजिक स्थिरता का दौर भी शुरू हो जाता है। वर्तमान समय में देश को ऐसे ही नौजवानों की आवश्कयता है जो प्रत्येक नकारात्मक धारा के प्रवाह को रोक कर राष्ट्रवाद, अध्यात्मकवाद और मानवतावाद की त्रिवेणी को प्रवाहित कर पूरे देश को तीर्थराज प्रयाग बना दें। हिन्दू महासभा सदा से ही देशभक्त हिन्दू युवाओं का संगठन रहा है। इसका प्रमाण यह है कि आजादी की लड़ाई में बलिदान देने वाले अधिकांश वीर युवक किसी न किसी रूप में हिन्दू महासभा से जुड़े थे। यह एक वैचारिक अभियान भी है जो युवाओं को देश और उसकी संस्कृति के विकासमान आस्थाओं से जोड़ता है। यह निश्चित समझा जाना चाहिए चाहिए कि कोई भी युवा पीढ़ी प्रगति के पथ को तब तक स्पर्श नहीं कर सकती जब तक वह अपने धर्म ओर अतीत केप्रति गौरव अनुभव नहीं करती। गौरवान्वित युवा शाक्ति ही अच्छे प्रबन्धक, चिकित्सक वैज्ञानिक, और तकनीकि विशेषज्ञ बनते हैं। चाहे जापान को ले या फिर चीन को, वे अपने अतीत केप्रति परम आस्थावान है। यहाॅ तक कि पश्चिमी विश्व अपने पुरातन संस्कारों और इतिहास को सुरक्षित रखना चाहता है। अमेरिका अपने धर्म और राष्ट्रीयता के प्रति जागरूक देश है। आपने देखा होगा कि वहाॅ सरकार किसी की भी हो, लेकिन विदेशी नीति में परिवर्तन नहीं होता। यह स्थायित्व उसे संसार में उसे महाशक्ति बनाता है। हम यह चाहते है कि हिन्दू महासभा में अधिक से अधिक युवाओं की सहाभागिता हो। यह समय की आवश्यकता है। हिन्दू धर्म पर चारों ओर से प्रहार हो रहे है। भारतीयता राजनीति का अर्थ ही हिन्दू विरोध है। जो जितना अधिक हिन्दू विरोध होता है कि उतना बड़ा नेता होता है। जो जातीय राजनीति करते है, उन्हें भी हम हिन्दू विरोधी की श्रेणी में रखते है। क्योंकि वे हिन्दू समाज की सम्पूर्ण शक्ति को विभाजित करते है। यह सब जानते है कि यूरोप और अमेरिका के सहयोग से भारत में धर्मान्तरण तेजी के साथ चल रहा है। हमारा अपना देश है। हमारी संस्कृति अपनी संस्कृति है। बाहर से आकर देश को खोखला करने वालों को रोकने का बल हमारे पास नहीं है। यह सब किसके संकेत पर हो रहा है? यह जानने से पहले हम विचार के कि हमने अपने धर्म के लिये क्या किया? क्या वंचित समाज के उत्थान के लिये हमारा कोई दायित्व नहीं है? क्या हमने विचार किया कि भारत सरकार 13 करोड़ मुसलमानों के लिये बजट का 35 प्रतिशत व्यय कर रही है। लेकिन हमारा वाल्मीकि समाज 17 करोड़ है। पूरे भारत में उस समाज के 10 डाटक्र या प्रशासनिक अधिकारी नहीं होंगे। सरकार केवल मुसलमानों पर ध्यान दे रही है। वे तो हमारे भाई है। हमने अपने इन वीर वाल्मीकि भाइयों के लिये क्या किया? युवा वर्ग इस पर विचार करे। हिन्दू महासभा को आपका साथ चाहिए वंचति हिन्दू को न्याय दिलाने के लिये और देश को महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिये।
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Chander Prakash Tyagi
कबिरा खड़ा बजार में
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लादेन की बीवियौ
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लादेन स्वर्ग में होगा या नर में इसका ज्ञान किसी को नहीं हैं वैसे हमारे हिसाब से वह नरक में ही होना चाहिए। पता चला है कि नरक के अधिकारी उससे वहाँ पूछताछ कर रहे है। सुना है कि नरक लोक में उस समय आतंक फैल गया जब वह वहाँ पहुँचा। इसलिये नहीं कि वह भयानक आतंकी था वरन इसलिये कि वह संसार के उन मजहबी नेताओं में से एक था जिसने सर्वाधिक शादियों की। अभी तक यह पता नहीं चल पया कि उसकी कितनी पत्नियाँ थी। काफी खोजबीन करने पाँच बीवियों और 17 बच्चों का पता चला हैं अमेरिका की गुप्तचर एजेंसी के अनुसार अभी एक दर्जन बीवियाँ और हो सकती है और कम से कम तीन दर्जन बच्चें। नरकवासियों के लिये यह समाचार बिलकुल गया है। अभी तक इस लोक में इतना बड़ा बीवी माफिया नहीं आया था। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जैसे आतंक के लिये पूरा संसार एक था। उसी तरह शादी करने के लिये भी पूरा जग समान था। उसकी बीवियाँ विभिन्न देशों की है। सबसे मजेदार बात यह है कि वह अलग-अलग भाषा बोलने वाली महिलाओं से विवाह करता था। इसके कई लाभ थे। पहला लाभतो यही था कि कोई भी पत्नी किसी दूसरे की भाषा का नहीं समझती थी। इससे घर में विवाद की सम्भावना लगभग शून्य हो जाती थी। आतंक और विवाह का शौक था। अतः वह प्रत्येक दो साल बाद दुल्हा बनना चाहता था। दुल्हे के कपड़े सदा तैयार रहते थे। पता नहीं कब विवाह करना पड़ जाये। उसका एक थैला मिला है, उसमें एक सेंहरा और ए.के-47 की गोलियाँ मिली है। उसके लिये ये दो चीजे ही महत्वपूर्ण थी। मित्राता करने का ढंग भी निराला था। जब तालिबानी नेता मुल्ला उमर से उसकी भेंट हुई तो उसके यह प्रस्ताव रखा कि मैं आपकी विवाह अपनी पुत्राी से कराता हूँ और आप अपनी पुत्राी का विवाह मुझ से कर दे। मुल्ला उमर की पहले से ही सात पत्नियाँ थी, वह राजी हो गया औ दोनों का निकाह हो गया। पाकिस्तान में जो सबसे कम उम्र की बीवी पकड़ी गई हैं वह मुल्ला उमर की पुत्राी ही है पिछले पाँच वर्षों में लादेन ने कोई विवाह नहीं किया। सुना यह भी है कि लादेन ने अस्थायी विवाह का भी विश्व की£तमान स्थापित किया है। अफ्रीका मूल की एक अभिनेत्राी ने जबरन सम्बन्ध बनाये और उसके एक पुत्राी थी है। यह अभिनेत्राी उस समय सामने आयी जब लादेन मारा गया। एक अनुमान के अनुसार उसके पास परमाण्ुा बम का खजाना तो नहीं मिला लेकिर बीवियों का खजाना अवश्य मिला है। फिलहाल नरक में उसे एक पिजड़े में बन्द करके रखा गया है ताकि नरकवासी इस विचित्रा प्राणी को देख सकें।
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Viresh Tyagi
भारत सरकार ने देश की किरकिरी कराई
भारत सरकार आतंकवाद को लेकर कितनी गम्भीर हे इसका पता पाकिस्तान को सौपी गई 50 मोस्टवांटेड आतंकियों की ताजा सूची से वजहुल कमर खान का है जो ठाणे में अंडे बेच रहा है। पाक को सौपी सूची में वह 41वें स्थान पर है। वजहुलकमर के विरूद्ध रेडकार्नर नोटिस जारी है फिर भी वह आराम में अंडों का व्यापार कर रहा है। रेडकार्नर नोसि इंटरपोल जारी करती है। इंटरपोल को भारतीय जांच एजेसिंया रेडकार्नर नोटिस जारी करने का निवेदन करती है। इससे बड़ी चमक और क्या होगी कि वह आराम का जीवन जी रहा है, कोई भी जांच एजेन्सी यह पता नहीं कर पायी कि वह कहां है? पाक को इस घटना से यह बहाना मिल गया है कि भारत हमें अनावश्यक बदनाम कर रहा है ये आतंकी इसके देश में नहीं भारत में ही है। सबसे विचित्रा बात यह है कि इस गलती को कोई भी विमाना स्वीकार करने को तैयार नहीं है। अन्तरराष्ट्रीय आधार पर भारत का यह पक्ष निर्बल हुआ है कि पाक आतंकियों की शरण स्थली है। अखिल भारत हिन्दू महासभा बहुत पहले से ही यह कहती चली आयी है कि भारत सरकार आतंकवाद के प्रश्न पर गम्भर नहीं हैं जो सरकार अफजल गुरू को फांसी से बयावी हो, वह आतंकवाद को कैसे राकेगी। सूची भी एक औपचारिकता थी। मन नहीं था कि आतंकवाद को रोका जाये।
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अध्यक्षीय (Chander Prakash Kaushik ‘Ji’)
खाद्यान्नों की बरबादी
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इस बार गेहूं की अच्छी फसल की सम्भावना है। सरकार के द्वारा खरीद की प्रक्रिया की तैयार चल रही है। पंजाब और हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में गेहूं मंडियों में पहुंचना आरम्भ भी हो गया है। खेद का विषय यह हैं कि गेहूं के भण्डारण की व्यवस्था नहीं की गई है। गत वर्ष का गेहूं जो क्रय किया गया था, वह भी खुले आकाश के नीचे रखा है। हजारों टन गेहूं बरबाद हो चुका हैं। सर्वोच्च न्यायायल ने इस गेहूं को निर्धनों को वितरित करने के आदेश दिये गये थे लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया वरन् उक्त गेहूं मदिरा निर्माण करने वाली कम्पनियों को सस्ते में दे दिया। देश की सत्तर प्रतिशत जनता भूखी है और सरकार उनके पेट की चिन्ता नहीं करती, अपितु मदिरा उद्योग को लाभ पहुंचा रही है। यह तमाशा पूरा देश देख रहा है लेकिन अर्धविक्षिप्त की भांति अज्ञानी और उदासीन बना हुआ हैं। उस पर इस बात का कोई प्रभाव नहीं हो रहा है कि देश में पर्याप्त खाद्यान्न होने के बाद भी आम आदमी भूखा क्यों है? वनवासी क्षेत्रों के हालात बहुत खराब है। फिर भी सरकार दिल को पत्थर बनाये हुए है। सरकार की इस संवेदनहीनता का लाभ ईसाई मिशनरियों उठा रही हैं, वे आदिवासियों को धन और भोजन का प्रलोभन देती हैं, तथा धर्म परिवर्तन करा देती है। क्या इस व्यापक धर्मान्तरण में केन्द्र सरकार का संवेदनहीन व्यवहार घातक भूमिका अदा नहीं कर रहा है। लाखों टन अनाज खराब हो रहा है। नया अनाज आने वाला है या मंडियों में आ चुका है। उसका भण्डारण कैसे होगा? सरकार ने इस पर विचार क्यों नहीं किया? जब सरकार के पास भण्डारण क्षमता नहीं है तो वह किसानों से अनाज क्यों खरीद रही है? एक-एक मंत्राी पर लाखों का व्यय होता है। जबकि प्रत्येक जनपद में भण्डारण गृह बनने में इतना पैसा नहीं लगेगा जितना की मंत्रियों को भत्तों में दे दिया जाता हैं। सरकार का काम भण्डारण व्यवव्था को ठीक करना था। यदि सरकार अपने स्तर पर भण्डारण का कार्य करने में असमर्थ थी तो निजी क्षेत्रा में यह कार्य दिया जा सकता था। खाद्यान्न की बरवादी केवल किसानों का ही अपमान नहीं हैं अपितु गरीबों का असम्मान करना हैं। साथ ही अपनी तानाशाही को भी प्रद£शत करना है। हिन्दू महासभा ने पिछले वर्ष भी यह कहा था कि गेहूं खरीद से पहले ही भण्डारण गृहों की व्यवस्था पूर्ण कर ली जाये। पर सरकार के द्वारा इस विषय पर कोई पहल नहीं की गई। गरीब आदमी सरकार के लिये कभी प्राथमिक नहीं रहा है। यही कारण है कि खाद्यान्नों को सुरक्षित रखने में सरकार की कोई रूचि नहीं हैं। विषय धन की कमी का नहीं हैं, राजनेताओं और उनके परिवार पर जितना व्यय सुरक्षा या अन्य कारणों से होता है। उस धन से ही अनेक आधुनिक विशाल भण्डारण गृह बनाये जा सकते थे। लेकिन सरकार को केवल एक परिवार की चिन्ता है। इस धरती के पुत्रा भूखे हैं, उनका अनाज बरबाद हो रहा है और सरकार दरबारियों की भांति सात जनपद पर हाथ जोड़े खड़ी है। लाखों परिवारों की चिन्ता करें, डाॅ॰ मनमोहन ंिसंह, असली भारत के उसी परिवार से है। जिनका सम्बन्ध इस धरती से युगों पुराना हैं। ये अचानक सत्ता पर कब्जा करने के लिये बाहर से नहीं आये।
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Chander Prakash kaushik
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National President
Akhil Bharat Hindu Mahasabha
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